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संस्कृत मर चुकी है, बॉडी सड़ रही है उसे जला दें - दिलीप मंडल

10:06 AM Apr 30, 2022 IST | Dilip C Mandal
संस्कृत मर चुकी है  बॉडी सड़ रही है उसे जला दें   दिलीप मंडल
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आप सबको सूचित करते हुए बेहद दुख हो रहा है कि संस्कृत की मौत हो चुकी है। सरकार के हवा फूंकने से वह जी नहीं उठेगी। कुछ लोग उसका अंतिम संस्कार करने से मना कर रहे हैं। वैसे ही जैसे बंदरिया अपने मरे बच्चे को छाती से चिपका कर घूमती है।

आप गौर से देखिए। संस्कृत की बॉडी सड़ रही है। मैं आपके शोक में शामिल हूँ। पर अब लाश को अब जला दें। कृपया संस्कृत की मौत के लिए दूसरे को दोष न दें। आपने अपने फ़ायदे के लिए उसे मर जाने दिया है। आपने इस भाषा को कभी जनभाषा बनने नहीं दिया।

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संस्कृत में आज तक कोई लोरी नहीं गाई गई। इस भाषा में बाज़ार में सामान ख़रीदा और बेचा नहीं गया। इसमें प्रेम गीत नहीं गाए गए। इस भाषा में लोगों ने आपस में झगड़ा नहीं किया। किसी माँ ने संस्कृत में अपने बच्चे को नहीं बुलाया।आपने खुद मौका देखकर अपने बच्चों को इंग्लिश स्कूल में डाल दिया।

आप इस पोस्ट पर संस्कृत में मुझे गाली तक नहीं दे सकते। ये औक़ात बना दी है आपने संस्कृत की। संस्कृत की शव परीक्षा से पता चला है कि यह हमेशा अविकसित शिशु रहा और आपने खुद इसकी हत्या कर दी। आपके उँगलियों के निशान संस्कृत के गले पर पाए गए हैं। अब इसे जला दें। बदबू आ रही है।

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(प्रो दिलीप मंडल की फेसबुक पोस्ट से साभार, व्यक्त विचार निजी हैं)

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