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पूना पैक्ट : जब दलितों के विरोध में गांधी ने लगा दी जान की बाज़ी !

09:14 AM Sep 24, 2022 IST | Mohit Kumar
पूना पैक्ट   जब दलितों के विरोध में गांधी ने लगा दी जान की बाज़ी
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24 सितंबर 1932 के दिन ही डॉ आंबेडकर और गांधी के बीच में पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर हुए थे। डॉ आंबेडकर ने अछूतों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र के अधिकार को छोड़ते हुए पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर किए थे। पुणे की यरवदा जेल में अछूतों को मिले ‘पृथक निर्वाचन क्षेत्र’ के अधिकार के ख़िलाफ़ गांधी आमरण अनशन पर थे।

देश भर से कांग्रेसियों ने बाबा साहब पर ज़बरदस्त दबाव डाला, सैकड़ों कांग्रेसी कभी उनके घर के बाहर हंगामा और नारेबाज़ी करते तो कभी उन्हें गांधी का हत्यारा बुलाते। कस्तूरबा गांधी तो डॉ आंबेडकर के सामने झोली फैलाकर अपने सुहाग की भीख माँगने लगी थीं। बाबा साहब उस समय बेहद तनाव में थे। मजबूरी में उन्हें पूना पैक्ट पर हस्ताक्षर करने पड़े और अछूतों को मिला अधिकार छोड़ना पड़ा लेकिन बाबा साहब ने बदले में अपने समाज के लिए आरक्षण का अधिकार हासिल किया।

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