For the best experience, open
https://m.theshudra.com
on your mobile browser.
Advertisement

क्या कन्नड़ एक्टर चेतन अहिंसा को ब्राह्मणवाद पर बोलने की सज़ा मिल रही है ?

08:51 PM Feb 25, 2022 IST | Sumit Chauhan
Advertisement

इन दिनों आपने एक ख़बर सुनी होगी, कर्नाटक में हिजाब को लेकर ज़बरदस्त बवाल मचा है। कोर्ट में हिजाब पहनने को लेकर सुनवाई चल रही है लेकिन जो जज इस मामले की सुनवाई कर रहे हैं, उनपर एक ट्वीट को लेकर कन्नड़ फ़िल्म स्टार चेतन अहिंसा को कर्नाटक पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। लेकिन ऐसा चेतन ने क्या लिख दिया था कि उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया?

चेतन अहिंसा आख़िर हैं कौन ?

Advertisement

इस मामले को समझेंगे लेकिन उससे पहले आप ये जान लीजिए कि चेतन अहिंसा आख़िर हैं कौन ? चेतन अहिंसा कन्नड़ फ़िल्मों के जाने-माने अभिनेता हैं। चेतन एक एंटी कास्ट एक्टिविस्ट हैं और जाति के आधार पर भेदभाव के ख़िलाफ़ मुखर रहते हैं। चेतन सोशल मीडिया से लेकर असल ज़िंदगी में ब्राह्मणवाद को खुली चुनौती देते हैं। चेतन का परिचय मैंने इसलिए दिया है ताकि आपको उनकी गिरफ़्तारी की वजह समझने में आसानी हो सके। चेतन को जिस ट्वीट के लिए गिरफ्तार किया गया है।

दरअसल, चेतन कुमार ने 16 फरवरी को जस्टिस कृष्णा दीक्षित के बारे में अपने एक पुराने ट्वीट को री-ट्वीट किया था। पुराने ट्वीट में जस्टिस कृष्णा दीक्षित द्वारा रेप के एक आरोपी को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने और पीड़िता को लेकर विवादित टिप्पणी करने की बात कही गई थी। चेतन ने इसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए इसे हिजाब विवाद से जोड़कर जस्टिस कृष्णा दीक्षित के बारे में कथित आपत्तिजनक बात कही।

Advertisement

जस्टिस कृष्णा दीक्षित पर टिप्पणी को लेकर गिरफ्तारी

रीट्वीट में चेतन ने लिखा कि ये एक ट्वीट है जिसे मैंने लगभग दो साल पहले कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले के बारे में लिखा था ‘जस्टिस कृष्णा दीक्षित ने दुष्कर्म के एक मामले में इस तरह की परेशान करने वाली टिप्पणी की थी। अब यही जज तय कर रहे हैं कि सरकारी स्कूलों में हिजाब स्वीकार्य है या नहीं। उनके पास आवश्यक स्पष्टता है?’

चेतन जिस जस्टिस कृष्णा दीक्षित के बारे में लिखा है, दरअसल उन्होंने 23 जून 2020 को रेप केस की सुनवाई के दौरान आरोपी को ज़मानत देते हुए पीड़िता के बारे में विवादित टिप्पणी की थी। जस्टिस दीक्षित ने कहा था ‘किसी भारतीय नारी को शोभा नहीं देता’ कि ‘बलात्कार’ किए जाने के बाद वो सो जाए। बलात्कार हो जाने पर हमारी महिलाओं का व्यवहार इस तरह का नहीं होता। शिकायतकर्ता ये सफाई नहीं दे पाई कि कथित अपराध के दिन वो रात 11 बजे ऑफिस क्यों गई थी और उसने अभियुक्त के साथ ‘ड्रिंक्स’ लेने पर एतराज़ क्यों नहीं किया?

जस्टिस दीक्षित की इस टिप्पणी पर तब खूब विवाद हुआ था

महिला अधिकार संगठनों ने इसे पितृसत्तात्मक, बेहद मर्दवादी और ब्राह्मणवादी सोच करार दिया था। महिला अधिकार संगठनों ने सवाल पूछा था कि पीड़ित पर ही दोष कैसे डाला जा सकता है? विवाद इतना बढ़ा था कि कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस टिप्पणी को बाद में ऑर्डर से हटा लिया था।

लैंगिक समानता की बात करने वाला कोई भी व्यक्ति जस्टिस दीक्षित के इस बयान को जायज़ नहीं ठहरा सकता। चेतन अहिंसा भी तब इसका विरोध ट्वीट के ज़रिए किया था और अब उसी ट्वीट को रीट्वीट करते हुए जस्टिस दीक्षित के बारे में आशंका ज़ाहिर की कि भला ऐसा जज जो महिलाओं के बारे में ऐसी मानसिकता रखता है, वो महिलाओं से जुड़े हिजाब केस की सुनवाई करेगा तो उसकी पितृसत्तात्मक सोच और पूर्वाग्रह फ़ैसले पर हावी हो सकते हैं। लेकिन ऐसी टिप्पणी को विवादित मानते हुए बेंगलुरु पुलिस ने चेतन को IPC की धारा 505 (2) वर्गों के बीच दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने वाला बयान और धारा 504 [शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान] के तहत गिरफ्तार किया है। दोनों गैर-जमानती अपराधों में दोषी पाए जाने पर तीन साल की जेल हो सकती है।

लेकिन यहाँ सवाल चेतन की गिरफ़्तारी के तरीक़े पर भी उठ रहे हैं। चेतन की पत्नी मेघा ने फ़ेसबुक पोस्ट के ज़रिए बेंगलुरु पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मेघा के मुताबिक़ 8 घंटे तक चेतन लापता रहे, पुलिस ने उनकी गिरफ़्तारी के बारे में कोई जानकारी नहीं दी और वो अपने पति के बारे में जानने के लिए थानों के चक्कर लगाती रहीं।

मेघा के मुताबिक़ चेतन फ़िलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। उनकी ज़मानत याचिका पर शुक्रवार को फ़ैसला आ सकता है। लेकिन यहाँ ये भी सवाल उठ रहा है कि क्या चेतन अहिंसा को जानबूझकर निशाना बनाया गया है? चेतन कुमार पर इससे पहले ब्राह्मणवाद की आलोचना करने पर भी 2 FIR दर्ज हुई थी। चेतन ने ब्राह्मणवाद को न्याय, भाईचारे और समानता के खिलाफ बताते हुए पेरियार और डॉ आंबेडकर के कथनों को शेयर किया था लेकिन बीजेपी से जुड़े लोगों ने उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत करा दी थी और तब भी उन्हें खूब परेशान किया गया था।

लेकिन बावजूद इसके चेतन लगातार ब्राह्मणवाद की बखिया उधेड़ते रहे हैं। जाति भेद भी खुलकर बोलते और लिखते हैं। बाबा साहब जैसे बहुजन नायक-नायिकाओं के विचारों की बात करते हैं। ऐसे में सवाल तो जरूर पूछा जाएगा कि कहीं चेतन को टारगेट तो नहीं किया जा रहा? और क्या बेंगलुरु पुलिस की ये कार्यवाही ब्राह्मणवाद पर चोट करने वाली आवाज़ को दबाने के लिए तो नहीं हुई है ? आपका इस बारे में क्या सोचना है, कमेंट में अपनी राय जरूर लिखें।

Advertisement
Tags :
×